Tuesday, 23 June 2026

लखनऊ अग्नि कांड की भयावह त्रासदी पर...

बुन रहे थे स्वप्न कल के, दोष क्या था बालकों का।
देखकर संतान बढ़ती, खुश हृदय था पालकों का।
खो नियंत्रण भूख पर क्यों, काल आ लपका इन्हीं पर,
भेद सकता उर न कोई, सृष्टि के इन चालकों का।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

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