Tuesday, 30 June 2026

आन मिला आषाढ़...

ताप भयंकर झेलकर, जले धरा के अंग।
झुलस-झुलस खुशरंग भी, हुए आज बदरंग।।

जेठ कहे आषाढ़ से,     सब्र न मुझमें वीर।
शीतल फाहे रख तुम्हीं, हरो जगत की पीर।।

आग उगलता ही रहा, झुलसा भू का चाम।
मिले इजाजत अब मुझे, कर लूँ कुछ आराम।।

सम्बन्धों की ताजगी, भावों की ले बाढ़।
खौफ खतम कर जेठ का, आन मिला आषाढ़।।

© सीमा अग्रवाल


चल अब अपने गाँव...

कर ली पूरी नौकरी, चल अब अपने गाँव।
बतियाएंगे बैठकर, वट-पीपल की छाँव।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Tuesday, 23 June 2026

लखनऊ अग्नि कांड की भयावह त्रासदी पर...

बुन रहे थे स्वप्न कल के, दोष क्या था बालकों का।
देखकर संतान बढ़ती, खुश हृदय था पालकों का।
खो नियंत्रण भूख पर क्यों, काल आ लपका इन्हीं पर,
भेद सकता उर न कोई, सृष्टि के इन चालकों का।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Wednesday, 17 June 2026

बेबी बूमर्स...

'ओके बूमर' कह हमें,    खारिज़ करते लोग।
पिछड़ा हमको मानकर, बात न करते लोग।।

ईयरबड रख कान में, फिरते ये ज़ूमर्स।
दर्द किसे अपना कहें, हम बेबी बूमर्स।।

साथ हमारे लग गया,      बेबी बूमर टैग।
अपमानों का हर घड़ी, पीते भर-भर पैग।।

बूमर पीढ़ी ले रही,    शनैः शनेः अवकाश।
छोड़ जेन जी के लिए,विस्तृत भू-आकाश।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

फोटोज गूगल से साभार

Monday, 15 June 2026

विकट घाम में पौसले....

विकट घाम में पौसले,     देते जीवन दान।
बड़े पुण्य का काम है, प्यासे को जलदान।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Thursday, 28 May 2026

आज फिर...

आज फिर इन बारिशों में,
भीगने का मन बनाया।
प्रीत जागी फिर हृदय में, 
फिर तुम्हारा ध्यान आया।

सृष्टि के अवयव सभी अब,
कर रहे संकेत सुख के।
साफ है मौसम हृदय का,
छँट रहे हैं मेघ दुख के।
मौन अधरों पर हमारे,
कौन मृदु मुस्कान लाया।

आज फिर....

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद (उ.प्र.)

Tuesday, 26 May 2026

मेरा औरा और...

मुझसे मेरी सी कहें, पर पीछे कुछ और।
बने रहें सबके भले,  यही आज का दौर।।

मेरे सिर आशीष है, उनके सिर पर मौर।
मेरा औरा और है,    उनका औरा और।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र.)