नस-नस में रस पूरता, आया फागुन मास।
रिसते रिश्तों में चलो, भर दें नयी उजास।।
भर मस्ती में झूमते, मन में लिए उमंग।
हुरियारे - हुरियारिनें, रँगे प्रेम के रंग।।
श्री राधे की लाठियाँ, श्री कान्हा की ढाल।
बरसाने की छोरियाँ, नंदगांव के लाल।।
फगुनाहट ये फाग की, देख गगन भी दंग।
इन्द्र धनुष से होड़ कर, उड़ते सातों रंग।।
टेसू हुलसित रागमय, खड़ा सुसज्जित द्वार।
ले फूलों की टोकरी, स्वागत में तैयार।।
प्राची के आँगन छपी, रंग-बिरंगी कीच।
सकुचाई भीगी धरा, नयन लाज से मीच।।
बनी धरा अभिसारिका, साजे नव श्रंगार।
सतरंगी पिचकारियाँ, घेर खड़ीं तैयार।।
धरा अभिसार उत्सवा, रंग चितेरा सूर्य।
रंगों की वर्षा करे, लिये हाथ में तूर्य।।
नफरत की होली जले, उड़ें प्यार के रंग।
आनंदमय त्यौहार हो, रहें सभी मिल संग।।
होली की शुभकामना, करें सभी स्वीकार।
मनचाही खुशियाँ मिलें, सुखी रहे परिवार।।
वैमनस्य का त्याग कर, रहें सभी मिल संग।
सीखें हम भी आज से, मौमाखी के ढंग।।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद