Thursday, 28 May 2026

आज फिर...

आज फिर इन बारिशों में,
भीगने का मन बनाया।
प्रीत जागी फिर हृदय में, 
फिर तुम्हारा ध्यान आया।

सृष्टि के अवयव सभी अब,
कर रहे संकेत सुख के।
साफ है मौसम हृदय का,
छँट रहे हैं मेघ दुख के।
मौन अधरों पर हमारे,
कौन मृदु मुस्कान लाया।

आज फिर....

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद (उ.प्र.)

Tuesday, 26 May 2026

मेरा औरा और...

मुझसे मेरी सी कहें, पर पीछे कुछ और।
बने रहें सबके भले,  यही आज का दौर।।

मेरे सिर आशीष है, उनके सिर पर मौर।
मेरा औरा और है,    उनका औरा और।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र.)

Monday, 25 May 2026

डूब जाए सूर्य भी जब...

डूब जाए सूर्य भी जब, घुप सघन अँधियार कर।
रो पड़े जब आसमां भी  बेहिसी विस्तार पर।
खिलखिला उठती यकायक देख जिसको यामिनी।
तालियाँ बजती रहें उस चाँद के किरदार पर।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद (उ.प्र)

Saturday, 23 May 2026

कुंडलिया...

बाँधे बच्चा पीठ पर,  करती दिनभर काम।
श्रम-सीकर पीकर रहे,   सहे जेठ की घाम।
सहे जेठ की घाम,   न कोई समझे मन को।
कैसे उतरे दूध,      लगे क्या खाया तन को।
हुई दोहरी पीठ,           झुके जाते हैं  काँधे।
दूभर सुख की आस,    सबर भी कैसे बाँधे।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

फोटो गूगल से साभार

Thursday, 7 May 2026

युद्ध और शान्ति....

मानवता को लीलते,  दंगा-युद्ध-फसाद।
हाथ मिले तो क्या मिले, बरबादी के बाद।।

युद्ध शांति  का हल नहीं, करो स्वस्थ संवाद।
मिल आपस में बात हो, मेटे सकल विवाद।।

अंत नहीं संघर्ष का,  घोषित युद्ध विराम।
बदले की रणनीतियाँ, कल क्या दें पैगाम।।

युद्ध-फसाद-तनातनी, वैश्विक मेधा-ह्रास।
बने आपसी रार से,    धरा राहु का ग्रास।।

देख दृश्य वीभत्स ये,       सुन चौतरफा शोर।
लिखी भाग्य में दिख रही, वैश्विक विपदा घोर।।

युद्ध मानसिक खौफ है, युद्ध नरक का द्वार।
जितनी इसमें जीत है,     उससे ज्यादा हार।।

सुख-साधन के बीच भी, साले एक अभाव।
अवशेषों में देखिए,      घातक युद्ध प्रभाव।।

बात न बनती युद्ध से, होता बस संहार।
त्राहित्राहि जनता करे, हर सूं हाहाकार।।

दुनिया एक कुटुंब है, रहें सभी मिल साथ।
स्वार्थ पूर्ण इस जंग से, क्या आएगा हाथ ?।।

स्वार्थ अहम् में चूर जन, रचते नित्य बबाल।
अहं युद्ध की घोषणा, क्षमा शांति की ढाल।।

युद्ध न केवल जानिए,   तलवारों का खेल।
करे शांति का अपहरण, बोए बिष की बेल।।

जीवन सुंदरतम बने, वरो शांति की राह।
बढ़ते युद्ध-प्रमाद से, लालच-नफरत-डाह।।

डॉ. सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )
"किंजल्किनी-2" से

Monday, 13 April 2026

जल में रहना है अगर...

अपशब्दों की और पर,    तान रहे बंदूक।
सुनकर क्या कोई भला, रह पाएगा मूक।।

पूँछ न बिल्ली मार दे,       बाँधे घंटी कौन।
कोई कुछ कहता नहीं, खड़े साध सब मौन।।

जल में रहना है अगर, बनो मकर का ग्रास।
चरना वरना एक दिन,    रूखी-सूखी घास।।

फूँक-फूँक रक्खो कदम, काम करो ना नीच।
श्वेतवसन में आपके,       लग ना जाए कीच।।

सदुपयोग बल का करो,   रोको भ्रष्टाचार।
काम करोगे नेक तो, होगी जय जय कार।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )

Saturday, 28 March 2026

रघुवर घर आए...

मुक्तक  ( छंद मरहटा )


१-
रघुवर घर आए, मन हरषाए, कष्ट हुए सब दूर।
जन-जन में निष्ठा, प्राण-प्रतिष्ठा, जोश अथक भरपूर।।
मंगल धुनि बाजे, अवध विराजे, अग-जग के कर्तार।
शुभ पावन आगम, भक्त समागम, खुशियाँ अपरंपार।।

२-
अग-जग के प्यारे, राजदुलारे, रामलला सुकुमार।
मोहनि अति मूरत, साँवली सूरत, कब से रही निहार।
स्वीकारो वंदन, दशरथ नंदन, दुखिया रही पुकार।
प्रभु दया विचारो, प्राण उबारो, फँसी नाव मझधार।

३-
घर-घर दीवाली, भोर निराली, लायी सुखद बहार।
जन-गण लालायित, मन आप्यायित, प्रभु का रूप निहार।
वन-वन प्रभु भटके, खल-दल पटके, छिड़ा महासंग्राम।
लिए संग सीता, परम पुनीता, लौटे प्रभु निज धाम।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

फोटो गूगल से साभार