मास चैत्र का आगमन, स्वागत है नववर्ष।
हर देहरी फूले फले, दिशि-दिशि बरसे हर्ष।।
सजा फूलकंडी सुघर, थाम हाथ में हाथ।
डोली में लेकर चले, घोघा माता साथ।।
बच्चे चुन-चुन ला रहे, फ्योंली और बुरांस।
घोघा माँ स्वीकारिए, पूरी कीजे आस।।
खेतों में सरसों खिली, खिले वृक्ष पर फूल।
खिली-खिली भू-सुंदरी, ओढ़े खड़ी दुकूल।।
घर-घर मंगल-हर्ष हो, चुभे न कोई शूल।
करते सुख की कामना, चढ़ा देहरी फूल।।
लिए फूलकंडी चले, घर-घर देहरी द्वार।
बच्चों की शुभकामना, करना माँ स्वीकार।।
रहे देहरी आपकी, फूलों से भरपूर।
रहें सदा खुशहाल सब, बना रहे जग नूर।।
मन हरते सौंदर्य से, मेटें मन के शूल।
धरती का श्रंगार हैं, ये अलबेले फूल।।
घर-घर गाते बाजगी, बजा दमाऊ ढोल।
आँगन-आँगन गूँजते, मधुर सुरीले बोल।।
ढोल दमाऊ ले चले, औली घर-घर द्वार।
मंगलमय हो आपको, फूलों का त्यौहार।।
साइत स्वाला पक रहे, उठती सोंधी गंध।
हलवा छोई पापड़ी, देते परमानंद।।
मना रहे हिलमिल सभी, नवल पुष्प का पर्व।
अपनी संस्कृति पर सदा, करें सभी जन गर्व।।
सामाजिक सद्भाव के, सूचक सुंदर पर्व।
अपने भारत को सदा, निज संस्कृति पर गर्व।।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद