Saturday, 11 July 2026

भाषिक विकार...

लिखते सँग ये संग को, हँस को लिखते हंस।
मठाधीश ही कर रहे, भाषा का विध्वंस।।

फर्क हंस-हँस में न क्यों, समझ रहे हुशियार।
अनुनासिक लगता जहाँ, लगा रहे अनुस्वार।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

Thursday, 2 July 2026

नाम सिया रक्खा था जिसका...

नाम सिया रक्खा था जिसका, कर्म स्याह कर डाले।
कितनी खुशियाँ निगलीं पल में, घर तबाह कर डाले।
रिश्ते गलत बना दूजे से,              मंगेतर को मारा।
किए आड़ में सिया नाम की,   करतब कितने काले।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

फोटो गूगल से साभार

Tuesday, 30 June 2026

आन मिला आषाढ़...

ताप भयंकर झेलकर, जले धरा के अंग।
झुलस-झुलस खुशरंग भी, हुए आज बदरंग।।

जेठ कहे आषाढ़ से,     सब्र न मुझमें वीर।
शीतल फाहे रख तुम्हीं, हरो जगत की पीर।।

आग उगलता ही रहा, झुलसा भू का चाम।
मिले इजाजत अब मुझे, कर लूँ कुछ आराम।।

सम्बन्धों की ताजगी, भावों की ले बाढ़।
खौफ खतम कर जेठ का, आया लो आषाढ़।।

© सीमा अग्रवाल


चल अब अपने गाँव...

कर ली पूरी नौकरी, चल अब अपने गाँव।
बतियाएंगे बैठकर, वट-पीपल की छाँव।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Tuesday, 23 June 2026

लखनऊ अग्नि कांड की भयावह त्रासदी पर...

बुन रहे थे स्वप्न कल के, दोष क्या था बालकों का।
देखकर संतान बढ़ती, खुश हृदय था पालकों का।
खो नियंत्रण भूख पर क्यों, काल आ लपका इन्हीं पर,
भेद सकता उर न कोई, सृष्टि के इन चालकों का।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Wednesday, 17 June 2026

बेबी बूमर्स...

'ओके बूमर' कह हमें,    खारिज़ करते लोग।
पिछड़ा हमको मानकर, बात न करते लोग।।

ईयरबड रख कान में, फिरते ये ज़ूमर्स।
दर्द किसे अपना कहें, हम बेबी बूमर्स।।

साथ हमारे लग गया,      बेबी बूमर टैग।
अपमानों का हर घड़ी, पीते भर-भर पैग।।

बूमर पीढ़ी ले रही,    शनैः शनेः अवकाश।
छोड़ जेन जी के लिए,विस्तृत भू-आकाश।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

फोटोज गूगल से साभार

Monday, 15 June 2026

विकट घाम में पौसले....

विकट घाम में पौसले,     देते जीवन दान।
बड़े पुण्य का काम है, प्यासे को जलदान।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद