Thursday, 19 March 2026

तप निरत ब्रह्मचारिणी...

कठोर व्रती तपस्विनी, ब्रह्मचारिणी मात।
भक्ति-मगन शिवलीन हो, भूलीं सुधबुध गात।।

लिए कमंडल वाम में, दाएँ में जप-माल।
तप निरत ब्रह्मचारिणी, दमके तेजस भाल।।

शिव-आराधन लीन हो,     त्यागे सारे भोग।
बिल्व पत्र के बल किए, सिद्ध साधना योग।।

निराहार निर्जल शिवा, शिवमय सुबहो-शाम।
त्याग पर्ण तन धारतीं,      पड़ा अपर्णा नाम।।

लिए शंभु की चाह में, जन्म एक सौ आठ।
जपें शिवा शिव नाम बस, भूलीं सारे ठाठ।।

चाह घनी मन में बसी, पाना है निज प्रेय।
भूलीं सारे भोग माँ,  याद रहा बस ध्येय।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )

Wednesday, 18 March 2026

कष्ट हरो माँ शैलजे...

शिव-आराधन लीन हो,     त्यागे सारे भोग।
बिल्व पत्र के बल किए, सिद्ध साधना योग।।

निराहार निर्जल शिवा, शिवमय सुबहो-शाम।
त्याग पर्ण तन धारतीं,      पड़ा अपर्णा नाम।।

लिए शंभु की चाह में, जन्म एक सौ आठ।
जपें शिवा शिव नाम बस, भूलीं सारे ठाठ।।

चाह घनी मन में बसी, पाना है निज प्रेय।
भूलीं सारे भोग माँ,  याद रहा बस ध्येय।।

सुख-दुख में समभाव हो, रहे बीच बन सेतु।
साधन शक्ति सुमंगला,  बने विजय का हेतु।।

वाम हस्त सोहे कमल, दाएँ हस्त त्रिशूल।
शैलसुता बृषवाहिनी, हरतीं जग के शूल।।

अर्द्ध चंद्र मस्तक फबे, कर सोहे त्रिशूल।
ताप हरो  माँ शैलजे, हर  लो सारे  शूल।।


अद्भुत माँ की शक्तियाँ...

नवग्रह एकाकार हो, करते जब मन क्लांत।
माता की नव शक्तियाँ,  करतीं उनको शांत।।१।।

अद्भुत माँ की शक्तियाँ, अद्भुत माँ का रूप।
दर्शन देतीं भक्त को,        धारे रूप अनूप।।२।।

नवरातों में पूज लो,       मैया के नवरूप।
मोहक छवि मन में बसा, हो जाओ तद्रूप।।३।।

कलुष वृत्ति मन की हरें, माता के नव रूप।
भक्ति-शक्ति के जानिए,   मूर्तिमंत स्वरूप।।४।।

पूजो माता के चरन,   ध्या लो उन्नत भाल।
वरद हस्त माँ का उठे, हर ले दुख तत्काल।।५।।

रिपुओं से रक्षा करे,    बने भक्त की ढाल।
बरसे जब माँ की कृपा, कर दे मालामाल।।६।।

मधुर-भाव चुन चाव से, सजा रही दरबार।
मेरे घर भी अंबिके,  आना  अबकी  बार।।७।।

माता के दरबार में, कोई ऊँच न नीच।
समरसता बरसे यहाँ, भर-भर नेह उलीच।।८।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )

Tuesday, 17 March 2026

आयी मीठी ईद...

कुरान गीता बाइबिल, सार सभी का एक।
धर्म चुनो कोई मगर,  कर्म करो बस नेक।।

पथ सच्चाई का वरो, करो न खोटे कर्म।
जात-पाँत सब व्यर्थ है, मानवता ही धर्म।।

ग्रंथ पवित्र कुरआन है, रहमत की बरसात।
सूरा पहला फ़ातिहा,  आयत जिसमें सात।।

पढ़ें सभी अल फ़ातिहा, सूरा प्रथम कुरान।
दया रहम अल्लाह करे,  बंदा अपना जान।।

हर बरकत दे आपको, पाक माह रमजान।
पथ पर नेकी के चलो, कहती है कुरआन।।

रोजे रख कर पढ़ें यदि, पाँचों वक्त नमाज।
अमन-चैन कायम रहे,   संयत रहे समाज।।

मदद मुस्तहिक़ की करें, आएँ उनके काम।
तन-मन-धन से साथ दें, करें न केवल नाम।।

जब्ते नफ़्स की तरबियत, देती है कुरआन।
पाकीज़ा मन को करे,  पाक माह रमजान।।

सब रातों में श्रेष्ठ है, रात लैलतुल कद्र।
जैसे कोई मौलवी,       जैसे कोई सद्र।।

रोज़ों का अंतिम चरण, हरि राया की धूम।
शॉपिंग करतीं नारियाँ,  गली-गली में घूम।।

हर्ष मगन मन नाचता, हुआ चाँद का दीद।
कितने रोज़ों बाद अब,    आयी मीठी ईद।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

Sunday, 15 March 2026

फूलदेई छम्मादेई...

मास चैत्र का आगमन,   स्वागत है नववर्ष।
हर देहरी फूले फले, दिशि-दिशि बरसे हर्ष।।

सजा फूलकंडी सुघर, थाम हाथ में हाथ।
डोली में लेकर चले,    घोघा माता साथ।।

बच्चे चुन-चुन ला रहे, फ्योंली और बुरांस।
घोघा माँ स्वीकारिए,     पूरी कीजे आस।।

खेतों में सरसों खिली, खिले वृक्ष पर फूल।
खिली-खिली भू-सुंदरी, ओढ़े खड़ी दुकूल।।

घर-घर मंगल-हर्ष हो, चुभे न कोई शूल।
करते सुख की कामना, चढ़ा देहरी फूल।।

लिए फूलकंडी चले, घर-घर देहरी द्वार।
बच्चों की शुभकामना, करना माँ स्वीकार।।

रहे देहरी आपकी,        फूलों से भरपूर।
रहें सदा खुशहाल सब, बना रहे जग नूर।।

मन हरते सौंदर्य से, मेटें मन के शूल।
धरती का श्रंगार हैं, ये अलबेले फूल।।

घर-घर गाते बाजगी, बजा दमाऊ ढोल।
आँगन-आँगन गूँजते, मधुर सुरीले बोल।।

ढोल दमाऊ ले चले, औली घर-घर द्वार।
मंगलमय हो आपको, फूलों का त्यौहार।।

साइत स्वाला पक रहे, उठती सोंधी गंध। 
हलवा छोई पापड़ी,         देते परमानंद।।

मना रहे हिलमिल सभी, नवल पुष्प का पर्व।
अपनी संस्कृति पर सदा, करें सभी जन गर्व।।

सामाजिक सद्भाव के,  सूचक सुंदर पर्व।
अपने भारत को सदा, निज संस्कृति पर गर्व।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

फोटोज गूगल से साभार

Tuesday, 3 March 2026

उड़ें प्यार के रंग...

नस-नस में रस पूरता, आया फागुन मास।
रिसते रिश्तों में चलो,  भर दें नयी उजास।।

भर मस्ती में झूमते, मन में लिए उमंग।
हुरियारे - हुरियारिनें,    रँगे प्रेम के रंग।।

श्री राधे की लाठियाँ, श्री कान्हा की ढाल।
बरसाने की छोरियाँ, नंदगांव के लाल।।

फगुनाहट ये फाग की, देख गगन भी दंग।
इन्द्र धनुष से होड़ कर,    उड़ते सातों रंग।।

टेसू हुलसित रागमय, खड़ा सुसज्जित द्वार।
ले फूलों की टोकरी,         स्वागत में तैयार।।

प्राची के आँगन छपी,   रंग-बिरंगी कीच।
सकुचाई भीगी धरा, नयन लाज से मीच।।

बनी धरा अभिसारिका, साजे नव श्रंगार।
सतरंगी पिचकारियाँ,    घेर खड़ीं तैयार।।

धरा अभिसार उत्सवा, रंग चितेरा सूर्य।
रंगों की वर्षा करे,     लिये हाथ में तूर्य।।

नफरत की होली जले, उड़ें प्यार के रंग।
आनंदमय त्यौहार हो, रहें सभी मिल संग।।

होली की शुभकामना, करें सभी स्वीकार।
मनचाही खुशियाँ मिलें, सुखी रहे परिवार।।

वैमनस्य का त्याग कर, रहें सभी मिल संग।
सीखें हम भी आज से,   मौमाखी के  ढंग।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Saturday, 14 February 2026

उन शहीदों को नमन...

पुलवामा में शहीद हुए हमारे वीर सैनिकों की स्मृति में ...

देश-हित जो    मर मिटे उन शहीदों को नमन।
छल से जिनके सर कटे उन शहीदों को नमन।

खाते रहे आतंकी की जो गोलियों पे गोलियाँ।
 सीना ताने रहे डटे   उन शहीदों को नमन।

रह सकें महफूज हम सब घर में अपने चैन से।
कर्तव्य-पथ से जो न हटे उन शहीदों को नमन।

जयहिंद-जयहिंद नींद में भी बड़बड़ाते जो सदा।
बदलते रहे नित करवटें  उन शहीदों को नमन।

शहादत उनकी याद कर नमनाक हैं अब भी नयन।
चले गए  तिरंगे में लिपटे उन शहीदों को नमन।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )
14 फरवरी