Sunday, 14 January 2024

क्या यही सुख-सार होगा...

चरम पर व्यभिचार होगा।
बढ़ रहा अँधियार होगा।

सात्विकता क्षीण होगी,
तमस का विस्तार होगा।

गालियों से बात होगी,
अस्मिता पर वार होगा।

ध्वस्त  होंगीं  सभ्यताएँ,
मूल्य मन पर भार होगा।

जिंदगी बेज़ार होगी,
मौत का व्यापार होगा।

पाशविकता पास होगी,
फेल शिष्टाचार होगा।

भंग होगी लय सुरों से,
टूटता हर तार होगा।

भूलकर कर्तव्य सारे,
याद बस अधिकार होगा।

क्या खबर षड़यंत्र क्या फिर,
ले रहा आकार होगा।

नींव आगत की यही क्या ?
क्या यही आधार होगा ?

क्या यही सुख-सार होगा ?
क्या यही संसार होगा ?

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र.)
फोटो गूगल से साभार

Wednesday, 10 January 2024

विश्व हिन्दी दिवस...

हमारी शान है हिन्दी,   हमारा मान है हिन्दी।
चिरंतन मूल्य-संस्कृति का,  सतत उत्थान है हिन्दी।
प्रवासी भी विदेशों में,    बजाते हिन्द का डंका,
मनुज जो हिन्द के वासी, उन्हें वरदान है हिन्दी।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

Tuesday, 9 January 2024

चमको हे मार्तंड...


लुढ़का पारा शून्य पर, कुहर-शीत की धूम।
सूरज भी आया मनो,   सर्द हिमालय चूम।।

पाला पड़ा दिमाग पर, हाथ-पाँव सब सुन्न।
बिस्तर में दुबके हुए,      पड़े सभी  हैं टुन्न।।

जेठ मास में क्रुद्ध से, उगल रहे थे आग।
पूस मास में दुम दबा, कहाँ छुपे अब भाग ?।।

मुख पर जब अति ओज था, कर में शक्ति प्रचंड।
बल अपना वह याद कर, चमको हे मार्तंड।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )
फोटो गूगल से साभार

Monday, 8 January 2024

रामलला घर आएंगे...

नमामि राम की नगरी, नमामि राम की महिमा।
नमामि राम का संयम, नमामि राम की गरिमा।

🙏🙏

भावमगन जन अवध पुरी के, राजकुँवर घर आएंगे।
सागर सुख के लहराएँगे, घट रीते भर जाएंगे।
गूँज रही धुन राम-नाम की, राम-नाम की जोत जली,
राम-नाम की नौका में सब, भव-सागर तर जाएंगे।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

Sunday, 7 January 2024

आया पाग-सनेस...

नमामि राम की नगरी, नमामि राम की महिमा।
नमामि राम का गौरव, नमामि राम की गरिमा।
🙏🙏

जनकपुरी से अवधपुरी में, आया पाग-सनेस।
उत्साहित हैं मिथिलावासी, मन में हर्ष विशेष।
समारोह निर्विघ्न पूर्ण हो, लौटें घर रघुवीर,
सोहें संग सुता आसन पर, जामाता अवधेश।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )

Thursday, 4 January 2024

राम-जोत घर-घर जले...



नया वर्ष नव हर्ष है,      छाया नव उल्लास।
राम-जोत घर-घर जले, रचे सुघड़ अनुप्रास।।

राम-नाम मुक्ता चुगो,  राम-राम  की टेर।
मनके प्रभु के नाम के, हरते मन के फेर।।

नमामि राम की नगरी, नमामि राम की महिमा।
नमामि राम का गौरव, नमामि राम की गरिमा।

राम नहीं हैं मात्र कल्पना, जग के पालनहारे हैं।
कितने दुष्ट दनुज जगती के, पल भर में संहारे है।
रिश्तों में आदर्श शिरोमणि, पुरुषों में सर्वोत्तम हैं।
मर्यादा के रखवाले प्रभु, भव के तारन हारे हैं।

भावमगन जन अवध पुरी के, राजकुँवर घर आएँगे।
सागर सुख के लहराएँगे,  घट रीते भर जाएँगे।
गूँज रही धुन राम-नाम की, राम-नाम की जोत जली,
राम-नाम की नौका में सब, भव-सागर तर जाएँगे।

खुशी में झूमते पुर-जन, ठुमकते-नाचते पुर-जन।
कथाएँ जो सुनीं प्रभु की, मगन मन बाँचते पुर-जन।
लला अब जल्द घर आएँ, विगत सुख लौट फिर आएँ,
निकट है आगमन बेला, निहारें रास्ते पुर-जन।

रामलला के विग्रह की जब, भव में प्राण प्रतिष्ठा होगी।
राम-नाम अधरों पर होगा, राम-नाम में निष्ठा होगी।
लूट मचेगी राम-नाम की, राम-नाम की ईप्सा होगी।
राजा राम बनें अग-जग के, सबके मन यह लिप्सा होगी।

© डॉ. सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )
फोटो गूगल से साभार

राम नाम मुक्ता चुगो...

राम नाम मुक्ता चुगो...

नया वर्ष नव हर्ष है,      छाया नव उल्लास।
राम-जोत घर-घर जले, रचे सुघड़ अनुप्रास।।

राम-नाम मुक्ता चुगो,  राम-राम की टेर।
मनके प्रभु के नाम के, हरते मन के फेर।।

नमामि राम की नगरी, नमामि राम की महिमा।
नमामि राम का गौरव, नमामि राम की गरिमा।

राम नहीं हैं मात्र कल्पना, जग के पालनहारे हैं।
कितने दुष्ट दनुज जगती के, पल भर में संहारे है।
रिश्तों में आदर्श शिरोमणि, पुरुषों में सर्वोत्तम हैं।
मर्यादा के रखवाले प्रभु, भव के तारन हारे हैं।

भावमगन जन अवध पुरी के, राजकुँवर घर आएँगे।
सागर सुख के लहराएँगे,  घट रीते भर जाएँगे।
गूँज रही धुन राम-नाम की, राम-नाम की जोत जली,
राम-नाम की नौका में सब, भव-सागर तर जाएँगे।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )
राम तस्वीर गूगल से साभार