असीम आकाश
Saturday, 11 July 2026
भाषिक विकार...
लिखते सँग ये संग को, हँस को लिखते हंस।
मठाधीश ही कर रहे, भाषा का विध्वंस।।
फर्क हंस-हँस में न क्यों, समझ रहे हुशियार।
अनुनासिक लगता जहाँ, लगा रहे अनुस्वार।।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )
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