Thursday, 28 May 2026

आज फिर...

आज फिर इन बारिशों में,
भीगने का मन बनाया।
प्रीत जागी फिर हृदय में, 
फिर तुम्हारा ध्यान आया।

सृष्टि के अवयव सभी अब,
कर रहे संकेत सुख के।
साफ है मौसम हृदय का,
छँट रहे हैं मेघ दुख के।
मौन अधरों पर हमारे,
कौन मृदु मुस्कान लाया।

आज फिर....

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद (उ.प्र.)

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