Thursday, 14 April 2016

हे प्रभु मेरे ! मुझ पर कृपा कर

आई हूँ जग से ठोकर खाकर
हर भौतिक सुख वहीं गंवाकर
अब कोई उजली राह दिखाकर
हे प्रभु मेरे ! मुझ पर कृपा कर

मन भटका संसार- सुखों में
झुलस गया अंगार- दुखों में
हाथ न कुछ भी मेरे आया
पल भर में सब हुआ पराया

माँगू खाली हाथ फैला कर
हे प्रभु मेरे ! मुझ पर कृपा कर

आखिर कब तक धरूं मैं धीर
अब तो हर लो मन की पीर
बहुत अंधेरा है इस जग में
पग- पग ठोकर खाऊं मग में

आशा की एक किरण दिखाकर
हे प्रभु मेरे ! मुझ पर कृपा कर !

~ सीमा

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