Thursday, 12 February 2015

वक्त बदला दुनिया बदली

वक्त बदला
दुनिया बदली
बदले हम-तुम भी
पर आपस में !
मैं तुम और तुम
मैं हो गए !
हो गए जुदा
बाहर से
जुड़ते गए पर
भीतर ही भीतर !
चिन्ह उगे तन पर
परिवर्तन के
पर आज भी
मन वही का वही
न बदला लेशमात्र भी !
अहसास न बदले
तुमसे जुड़े
मेरे भाव न बदले !
खयालात न बदले !
आज भी मैं तुममें
तुम मुझमें
खुद को
जिया करते हैं !
दुनिया की
नजरों से दूर
मन की दुनिया में
खुल के जिया करते हैं !

- सीमा

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