Saturday, 25 April 2015

कैसी झमाझम सारी रात हुई !

बिन मौसम ही बरसात हुई
अंखियों से सारी रात हुई
मन-किसान झूला फांसी पर
सुख की खेती बरबाद हुई !

पसरा हर सूं गहन अंधेरा
भाग्य छला गया क्यूँ मेरा
मुँह फुलाए बैठीं खुशियाँ
हाय ! ऐसी क्या बात हुई !

देखे मन ने अनगिन सपने
सब्र की आँच पर रखे तपने
झुलस गए पर पर ही उनके
क्या सोचा क्या औकात हुई !

क्या क्या अरमान बोए थे
क्या क्या ख्वाब संजोए थे
चली न एक किस्मत के आगे
देखो ! कैसी करारी मात हुई !

उजड़ी बगिया आशाओं की
कहानी शुरू हुई बाधाओं की
मधुर, सुहानी, मदमस्त हवा
तूफान और झंझावात हुई !

बिन मौसम ही बरसात हुई
कैसी झमाझम सारी रात हुई !

--- सीमा अग्रवाल ---

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