Thursday, 26 March 2026

चैत्र मास की तिथि नवम्...

चैत्र मास की तिथि नवम्, लिया राम अवतार।
कौशल्या की कोख से,    उपजा जग-कर्त्तार।।

काँधे पर कोदंड है,   अभिमंत्रित हर वाण।
शोषक का संहार कर, दें शोषित को त्राण।।

राम एक गतिशीलता, राम एक हैं पंथ।
राम चरित यों जानिए, जैसे पावन ग्रंथ।।

लीला अद्भुत आपकी, अद्भुत है लालित्य।
वर्णित जिसमें आप हैं, अद्भुत वह साहित्य।।

रोम-रोम में रम रहे,       रमण करें श्रीराम।
मन मानस मेरा बने, सुखद अयोध्या धाम।।

खिले सरोरुह से नयन, कोमल कुसुमित प्रान।
चरण-कमल से आपके,  मन   पावन-उद्यान।।

डोर तुम्हारे हाथ प्रभु, आर करो या पार।
जगत हमारा पालना, तुम हो पालनहार।।

किए बिना वन में गमन, राम न होते राम।
संघर्षों में जीत है,        हारें नित आराम।।

त्याग समर्पण साधना, कर्मनिरत निष्काम।
वनवासी होकर हुए,    मन-मन वासी राम।।

रहता जल में ज्यों कमल, रहे जगत में राम।
माया से निर्लिप्त थे,     मायापति सुखधाम।।

राजकुँवर रघुवंश के,    वश में जिनके पौन।
विरक्त समाधि लीन वह, योगी उनसा कौन ?

करो समर्पण राम सा,  सीता सा संघर्ष।
जो तुम चाहो देखना, प्रेम - नेम उत्कर्ष।।

अद्भुत संयम शील है,    नहीं आप सा अन्य।
चरण-आचरण आपके, करें जगत को धन्य।।

राम सरिस हो आचरण, राम सरिस हो त्याग।
मिटें तामसी वृत्तियाँ,      जागें जग के भाग।।

राम नाम का ध्यान ही,   करता बेड़ा पार।
बंधन जिसके हम बँधे, वही मुक्ति आधार।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )


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