Tuesday, 11 October 2016

ए चाँद मेरे

ए चाँद मेरे रुख कर ले इधर
तेरा मुख तो नजर आ जाए !
मैं भी चख लूँ सुखमय हाला
दो बूँद गर तू छलका जाए !

मुझे मिले जो तेरी चाँदनी
सुकूं मेरे मन को आ जाए !
एक किरन निसृत हो तुझसे
सूने अंक में आ समा जाए !

- सीमा

No comments:

Post a Comment