Thursday, 22 October 2015

राम नहीं, रावन भी नहीं ---

राम नहीं, रावन भी नहीं
बस तुममें तुमको देखा है !
सबसे अलग सबसे जुदा
बस हमने तुमको देखा है !

छल नहीं, कोई छद्म नहीं
अहं नहीं, कोई दंभ नहीं
स्नेहिल नजरों से मंद मंद
मुस्कुराते तुमको देखा है !

धवल चंद्र सम रूप तुम्हारा
वृत्त ज्यों निर्मल जल की धारा
श्रवनों में मधुरिम बतियों का
रस ढुलकाते तुमको देखा है !

यूँ तो दूर हो तुम पास नही
मिलने की कोई आस नहीं
आँख मूंदकर पर जब देखा
इस दिल में तुमको देखा है !

                     --- सीमा ---

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