Wednesday, 27 January 2016

आँखों में देखो---

आँखों में देखो अश्क भरे हैं
हुए आज फिर जख्म हरे हैं !

रह गए बस ठूँठ गमों के
सुख के तो सारे पात झरे हैं !

गुमसुम-गुमसुम खोए-खोए
अरमां सहमे-सहमे डरे-डरे हैं !

चलूँ मैं तनकर बोलो कैसे !
दिल पर जब इतने बोझ धरे हैं !

पहन ले सीमा मुस्कान- मुखौटा
तेरे दुख तो ये टारे नहीं टरे हैं !

- सीमा

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