वैलेंटाइन वीक...
हम भी चले मनाने अबके
वैलेंटाइन वीक।
डूब रहे थे प्रेम-भँवर में
तोड़ पुरानी लीक।
पहला दिन था चुन बगिया से
लाए एक गुलाब।
घुटनों के बल बैठ प्रिय को
देकर कहा जनाब-
तुम भी करो प्रपोज हमें अब
देकर प्रेम-प्रतीक।
एक हाथ में हाथ हमारा
एक हाथ में रोज़।
बड़े प्रेम से निरख नयन में
प्रिय ने किया प्रपोज।
लव यू लव यू कहकर बीता
दूजा दिवस सटीक।
दिवस तीसरा प्रेम पगा था
लाया नया खुमार।
रंग-बिरंगी चॉकलेट का
मिला हमें उपहार।
रखा कौर इक ज्यों ही मुँह में
आई हमको छींक।
टैडी लेकर आए प्रियतम
चौथे दिन की रात।
रखकर उसे हाथ में बोले
स्वीकारो सौगात।
कहो बात कुछ अपने मन की
बैठो निकट घरीक।
प्रॉमिस डे पर बोले प्रियवर
प्रण लेता हूँ आज।
साथ निभाऊँ सदा तुम्हारा
पूर्ण करूँ हर काज।
प्रण पर अपने अडिग रहूँगा
समझो नहीं अलीक।
हग डे पर हम और पिया जी
हो आलिंगन बद्ध।
साथ-साथ जीने-मरने को
थे दिल से प्रतिबद्ध।
डाल कमर में बाँह प्रिय ने
खींच लिया नजदीक।
आया किस डे खड़े निकट प्रिय
सटा चीक से चीक।
नत आनन हम लाज भरे, पर
डटे रहे निर्भीक।
अधर अधर रख बोले प्रियतम
करो प्रेम तस्दीक।
उत्सव का माहौल बना था
दृश्य सुखद रमणीक।
देने आशीर्वाद हमें जब
अपने हुए शरीक।
सराबोर कर गयी हृदय को
अद्भुत ये तकनीक।
सात दिवस ये सात जनम से
देते ये संदेश।
बनी रहे मृदुता रिश्तों में
मधुमय हो परिवेश।
गोते खाकर प्रेमोदधि में
भूले गम-तारीक।
खुशी-खुशी यूँ मना हमारा,
वैलेंटाइन वीक।
© डॉ. सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उ.प्र. )
"गीत सौंधे जिंदगी के" से
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