Monday, 30 October 2017

निपट निराली प्रीत...

कभी आँखों में आँसू हैं, कभी अधरों पे गीत।
अजब-गजब सा मीत है, निपट निराली प्रीत।।

रोऊँ ना तो क्या करूँ, किस विध धरूँ मैं धीर !
वो निर्मोही क्या जाने, मेरे प्रेमिल मन की पीर !!

- सीमा

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