अपशब्दों की और पर, तान रहे बंदूक।
सुनकर क्या कोई भला, रह पाएगा मूक।।
पूँछ न बिल्ली मार दे, बाँधे घंटी कौन।
कोई कुछ कहता नहीं, खड़े साध सब मौन।।
जल में रहना है अगर, बनो मकर का ग्रास।
चरना वरना एक दिन, रूखी-सूखी घास।।
फूँक-फूँक रक्खो कदम, काम करो ना नीच।
श्वेतवसन में आपके, लग ना जाए कीच।।
सदुपयोग बल का करो, रोको भ्रष्टाचार।
काम करोगे नेक तो, होगी जय जय कार।।
© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )