Monday, 13 April 2026

जल में रहना है अगर...

अपशब्दों की और पर,    तान रहे बंदूक।
सुनकर क्या कोई भला, रह पाएगा मूक।।

पूँछ न बिल्ली मार दे,       बाँधे घंटी कौन।
कोई कुछ कहता नहीं, खड़े साध सब मौन।।

जल में रहना है अगर, बनो मकर का ग्रास।
चरना वरना एक दिन,    रूखी-सूखी घास।।

फूँक-फूँक रक्खो कदम, काम करो ना नीच।
श्वेतवसन में आपके,       लग ना जाए कीच।।

सदुपयोग बल का करो,   रोको भ्रष्टाचार।
काम करोगे नेक तो, होगी जय जय कार।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद ( उत्तर प्रदेश )